Wednesday, April 23, 2014

तोगडि़या एवं गिरिराज की जहरीली टिप्पणियां बता रही हैं कि मोदी के राज में क्या होगा?

एल.एस. हरदेनिया

डाक्टर प्रवीण तोगडि़या और बिहार  भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता द्वारा की गई टिप्पणियों ने पुनः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असली चेहरे को उजागर कर दिया है। डाक्टर प्रवीण तोगडि़या ने गुजरात के एक शहर के हिन्दू मोहल्ले में एक मुसलमान द्वारा मकान खरीदने पर सख्त ऐतराज जाहिर किया और उस क्षेत्र के हिन्दुओं से कहा कि वे मुसलमान द्वारा खरीदे जा रहे मकान पर कब्जा कर लें या उसमें आग लगा दें। इसी तरह, बिहार के गिरिराज सिंह ने कहा है कि जो भी नरेन्द्र मोदी का विरोध करता है उसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए। डाक्टर प्रवीण तोगडि़या, संघ परिवार के एक बहुत ही महत्वपूर्ण सदस्य हैं। संघ परिवार की अनेक षाखाएं हैं, जिनमें एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण शाखा विश्व हिन्दू परिषद है। इस समय डाक्टर तोगडि़या विश्व हिन्दू परिषद के मुखिया हैं। इसी तरह, गिरिराज सिंह, जो भाजपा के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार हैं, बिहार  मंत्रिपरिषद के सदस्य रहे हैं, नीतीष कुमार के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में वे भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में शामिल रहे हैं। उनके पास महत्वपूर्ण विभाग रहे हैं।

डाक्टर तोगडि़या और गिरिराज पहले भी अनेक बार भड़काऊ बयान दे चुके हैं। डाक्टर तोगडि़या जब भी बोलते हैं, मुसलमानों के विरूद्ध जहर उगलते हैं। अभी कुछ दिनों पहले उन्होंने अपने एक वक्तव्य में कहा था कि यदि मैं प्रधानमंत्री बनता हूं तो मुसलमानों का मताधिकार छीन लूंगा। उसके पहले भी वे अनेक भड़काऊ वक्तव्य दे चुके हैं। उनकी गतिविधियां आपत्तिजनक होती हैं और मुसलमानों के विरूद्ध टिप्पणी करने में उन्हें विषेषज्ञता हासिल है। नरेन्द्र मोदी को भी डाक्टर तोगडि़या की टिप्पणियां सहन नहीं होतीं। जब से मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने हैं ,डाक्टर तोगडि़या पर लगभग प्रतिबंध लगा हुआ है। वे वहां किसी प्रकार की गतिविधि नहीं कर सकते, सभाएं नहीं ले सकते हैं, रैलियों को संबोधित नहीं कर सकते और यहां तक कि पत्रकारों से भी मुखातिब नहीं हो सकते हैं।

यहां यह बता देना प्रासंगिक होगा कि डाक्टर तोगडि़या गुजरात के ही रहने वाले हैं। वे एक अच्छे डाक्टर हैं और बताया जाता है कि उन्हें कैंसर का इलाज करने में विशेषज्ञता हासिल है। चिकित्सा के पवित्र व्यवसाय को छोड़कर तोगडि़या समाज को विभाजित करने और जहरीले प्रचार करने वाली गतिविधियों में संलग्न रहते हैं। उन्हें अपने गैर-जिम्मेदाराना भड़काऊ वक्तव्य के कारण अनेक गैर भाजपा शासित राज्यों में कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा है। एक बार वे बिहार में थे। उस समय लालू प्रसाद यादव का शासन था। हवाई जहाज से उतरने के तुरंत बाद उन्हें उसी हवाई जहाज से वापिस भेज दिया गया था। मध्यप्रदेश में भी दिग्विजय सिंह के शासन के दौरान उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की गई थी।

जहां तक गिरिराज सिंह का सवाल है वे नीतीष कुमार मंत्रिपरिषद के सदस्य रहते हुए भी अनेक बार भड़काने वाले वक्तव्य दे चुके हैं। जब पटना में नरेन्द्र मोदी की सभा के दौरान बम विस्फोट हुआ था तो उन्होंने आरोप लगाया था कि नीतीष कुमार, मोदी की हत्या करना चाहते हैं। जब वे मंत्री परिषद के सदस्य थे तब भी वे नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते थे। इस तथ्य के बावजूद कि नीतीष कुमार, नरेन्द्र मोदी को फूटी आंख नहीं सुहाते थे। उनके भड़काऊ भाषणों के अन्य उदाहरण भी सभी को ज्ञात हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्य करने की अपनी एक शैली है। इस शैली के अंतर्गत संघ परिवार में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले नेता कोई न कोई भड़काऊ बयान दे देते हैं या गतिविधियां करते हैं। जहां तक मैं समझता हूँ यह एक प्रकार से मिलीभगत से संपन्न होता है। अपने विवादग्रस्त नेताओं से इस तरह के भड़काऊ वक्तव्य दिलाकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह समझने की कोषिष करता है कि आम आदमियों में इस तरह के वक्तव्यों का क्या असर हुआ। क्योंकि जो वक्तव्य दिये जाते हैं वे संघ परिवार के राजनीतिक दर्शन के अनुकूल होते हैं। जैसे, संघ परिवार भी इस बात का समर्थक है कि जो भी मुसलमान इस देश के प्रति वफादार नहीं है उसे भारत में रहने का अधिकार नहीं है। जनसंघ और बाद में भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा है। संघ के जो उद्देष्य है उन्हें राजनीतिक स्तर पर पूरा करने का उत्तरदायित्व भाजपा को सौंपा गया है। जहां तक संघ की अन्य विचारधाराओं का सवाल है उन्हें प्रचारित और प्रसारित करने का उत्तरदायित्व विष्व हिन्दू परिषद जैसी संस्थाओं को सौंपा गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ए बंच आफ थाट्स में स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जहां भी मस्जिद बनी हुई है वहां एक छोटा पाकिस्तान है। संघ ने प्रायः मुसलमानों की देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगाया है। न सिर्फ तोगडि़या एवं गिरिराज सिंह के द्वारा दिये गये वक्तव्या बल्कि जब भी सांप्रदायिक दंगा होता है तब उसका मुख्य कारण संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा लगाये गए भड़काऊ नारे भी होते हैं। जैसे, कुछ वर्षों पहले मध्यप्रदेश के नरसिंहगढ़ नामक शहर में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की थी। हम लोग वहां के दंगे की जांच करने गए थे। हिंसा पीडि़त अनेक लोगों ने बताया कि मुसलमानों के विरूद्ध भड़काऊ नारे लगाए गए हैं। इनमें से एक नारा था ‘‘कटी पतंग, कटा पान, कटुए जाओ पाकिस्तान’’

इस नारे की रिकार्डिंग हमें एक पुलिस अधिकारी ने भी सुनाई थी। इस तरह, डाक्टर तोगडि़या हिन्दू इलाके में एक मुसलमान को नहीं रहने देना चाहते या गिरिराज सिंह चाहते हैं कि जो भी मोदी के विरूद्ध है, वह पाकिस्तान चला जाए, तो वे यथार्थ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को ही प्रचारित कर रहे हैं। यदि भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वास्तव में यह मानते हैं- जैसा कि इन दोनों द्वारा दिए गए वक्तव्य के बाद संघ और भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने दावा किया-कि ये वक्तव्य उचित नहीं है तो डाक्टर तोगडि़या और न ही गिरिराज सिंह इस तरह के भड़काऊ बात कह सकते थे। भाजपा के प्रवक्ता ने गिरिराज सिंह के वक्तव्य की अत्यधिक कमजोर भाषा में निंदा की है। जैसे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने यह वक्तव्य दिया कि गिरिराज सिंह द्वारा कही गई बात को वे गैर जिम्मेदाराना मानते हैं। भाजपा की एक प्रवक्ता निर्मला सीतारमन से जब यह पूछा गया कि क्या भारतीय जनता पार्टी गिरिराज के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगी तो वे मौन रहीं। तोगडि़या के मामले में तो संघ के प्रवक्ता ने कहा कि संघ से जुड़ा कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत कर ही नहीं सकता। 

यदि संघ परिवार या भाजपा गिरिराज और तोगडि़या के वक्तव्यों को अनुचित मानते हैं तो उन्हें दोनों के विरूद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी, भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नरेन्द्र मोदी, मुसलमानो का समर्थन जीतने का प्रयास कर रहे हैं वहीं तोगडि़या और गिरिराज सिंह जैसे लोग मुसलमानों के मन में भय की भावना पैदा कर रहे हैं। ये दोनों बातें विरोधाभासी हैं परंतु संघ परिवार को विरोधाभासी बातें कहने और गतिविधियां करने में महारथ हासिल है। इस तरह के वक्तव्यों से अल्पसंख्यकों के मन में शंकाएं पैदा होती हैं। इतिहास बताता है कि जिस समाज और देष ने अल्पसंख्यकों को सम्मान से नहीं रखा वे देश और समाज अंततः टूट गए। जर्मनी में हिटलर ने यहूदियों की नस्ल तक को समाप्त करने का प्रयास किया। नतीजे में न हिटलर बचा और न ही जर्मनी। पाकिस्तान में चुनचुन कर हिन्दुओं को और ईसाईयों को भगाया गया और आज भी भगाया जाता है। पाकिस्तान आज दुनिया के सबसे ज्यादा पिछड़े देशों में से एक है। पाकिस्तान इस समय घृणा की आग में जल रहा है। मैं पिछले वर्ष जब पाकिस्तान गया था तो वहां के नौजवानों ने यह स्वीकारा था कि हम यदि अपने देश  से हिन्दुओं को नहीं भगाते तो शायद हमारा यह हाल नहीं होता जो हो गया है।


यदि संघ परिवार पाकिस्तान की नीति पर चलना चाहता है तो अंततः इस नीति पर चलकर हम हमारे देश  को उसी गर्त में फेंक देंगे जिसमें पाकिस्तान को वहां के संकुचित विचार वाले नेताओं ने फेंका था। पाकिस्तान की यात्रा के दौरान मुझे एक सुप्रसिद्ध शायरा से यह सुनने को मिला कि ‘‘कि हम पाकिस्तानियों को बहुत अफसोस है कि तुम हिन्दुस्तानी हमारे जैसे होते जा रहे हो’’

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