एल. एस. हरदेनिया



खंडवा के कलेक्टर श्री अग्रवाल ने हमें 5:30 अपरान्ह मिलने का समय दिया था। हम लोग ठीक 5:30 बजे कलेक्टरेट पहुँच गए थे। इंतजार करते आधे घंटे से ज्यादा समय बीत गया था। हमने उनके पी.ए.से जानना चाहा कि आखिर इतना समय क्यों लग रहा है।

पी.ए. ने बताया कि शांति समिति की बैठक चल रही है। मेरे पास कलेक्टर का मोबाईल नंबर था। मैंने नंबर लगाया, संयोग से कलेक्टर ने उठा लिया। मैंने बताया कि आपके द्वारा दिये गये समय के अनुसार हम लोग पहुँच चुके हैं। हमें कितना और इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि खंडवा की स्थिति गंभीर है। मीटिंग जारी है थोड़ा समय और लग सकता है। कुछ समय बाद उनने हमें बुला लिया।

 हमने कलेक्टर को बताया कि हम लोग सेक्युलर फोरम के कार्यकर्ता हैं और खंडवा की स्थिति का जायजा लेने आये हैं। कृपया हमें बतायें कि खंडवा में स्थिति बिगड़ने का कारण क्या था? उन्होंने कहा कि मैंने तो अभी चंद दिन पहले ही यहां का कार्यभार संभाला है। यहां पुलिस अधीक्षक बैठे हैं वे यहां पहले से पदस्थ हैं। वे ही आपको जानकारी दे पायेंगे।

 पुलिस अधीक्षक श्री मनोज शर्मा ने बताया कि एक नवजवान ने किसी अन्य की साइट हाईजैक कर फेसबुक में कुछ ऐसी चीजें डाल दी थीं जिससे मुस्लिम समाज आक्रोशित हो उठा। आक्रोश की स्थिति में एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई। इस युवक का नाम सुशील पुंडगे था। उसकी आयु लगभग 34 वर्ष की थी। वह इंश्योरेंस एजेन्ट था। उसका उस दिन के घटनाक्रम से कुछ लेना देना नहीं था। हमने वह जगह भी देखी है जहां उसकी हत्या की गई थी। घटना विस्फोटक मोड़ न ले इसलिये शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। हिन्दू युवक के हत्यारे की गिरफ्तारी हो चुकी है। यद्यपि लोग गिरफ्तारी में देरी से नाराज थे। हिन्दू युवक की हत्या 30 जुलाई को हुई थी। दिनांक 14 अगस्त को कुछ हिन्दू संगठनों की ओर से गिरफ्तारी की मांग करते हुये विरोध प्रदर्शन किया गया। बताया गया कि प्रदर्शन में 4000 लोग शामिल थे। कुछ अन्य लोगों के अनुसार प्रदर्शन में 500-600 लोग शामिल थे। प्रदर्शन में युवक की विधवा पत्नी और उसके परिवार के कुछ और सदस्य भी शामिल थे। कुछ लोगों ने हमें बताया कि जिस समय प्रदर्शन चल रहा था उस समय 144 धारा लागू थी। पुलिस अधीक्षक का कहना था कि धारा 144 उठा ली गई थी। सत्य कुछ भी हो पर यह स्पष्ट है कि उस दिन भी खंडवा में स्थिति सामान्य नहीं थी। और प्रदर्शन की अनुमति देना कहां तक उचित था? यह भी बताया गया कि जिस दिन प्रदर्शन किया गया उस दिन प्रात: हत्यारे की गिरफ्तारी हो गई थी। जब धरने की प्रमुख मांग पूरी हो गई थी उसके बाद प्रदर्शन की इजाजत देना भी कहां तक उचित था।

 जिस दिन प्रदर्शन हुआ, उसी दिन एक और दु:खद घटना घटी। कुछ लोगों ने एक मुसलमान युवक की हत्या कर दी। वैसे हत्या प्रदर्शन के समाप्त होने के बाद हुई थी, पर आरोपित है कि प्रदर्शन के दौरान काफी भड़काऊ भाषण दिये गये थे। प्रदर्शन के दौरान और उसके पहले ही बार-बार यह बात की जा रही थी कि उन्होंने हमारे एक आदमी को मारा है हम उनके दो और चार आदमियों को मारेंगे। इस बात की पूरी संभावना है कि यह बात जुनून में परिवर्तित हो गई हो और किसी सिरफिरे ने एक मुस्लिम की हत्या कर दी। फोरम की टीम के सदस्य, जिनकी हत्या की गई थी उनके परिवारों से मिलने गये। हम पहले मृत जावेद के परिवार से मिले। जावेद के पिता ने बताया कि मेरा बेटा बहुत ही सीधा था। वह किसी भी झगड़े झांसे में नहीं था। उसका कद आसाधारण रूप से छोटा था। वह पुताई करके अपनी जीविका चलाता था। अभी थोड़े दिनों पहले ही उसका विवाह हुआ था। बात करते हुए पिता रहमतउल्ला की आंखों से आंसू झरझर करके गिर रहे थे। वे कह रहे थे कि मुझे जितना दु:ख अपने बेटे की हत्या का है उतना ही दु:ख मुझे हिन्दू युवक की हत्या से भी है। उस दौरान वहां बैठे एक युवक ने बताया कि हम दोनों दु:खी परिवारों का मिलन कराना चाहते थे परंतु पुलिस ने हमें रोक दिया। जावेद के घर की हालत बता रही थी कि वह एक गरीब परिवार से था। बीच-बीच में जावेद की बहन भी कुछ महत्वपूर्ण बातें बता रही थी। परदे के पीछे से जावेद की पत्नी भी रोते हुए दिख रही थी। जावेद के पिता ने बताया कि उन्हें शासन की ओर से एक लाख रूपये मिले हैं। पूछने पर उन्होंने यह भी बताया कि शासन की ओर से कोई भी उनका दु:ख बांटने नहीं आया। न ही राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि उनके घर आये। बाद में किसी ने बताया कि आप पार्टी के लोग उनके घर आये थे।

हम दु:खी हिन्दू परिवार से भी मिले। जिनसे हमारी मुलाकात हुई उनमें विधवा मीना, मीना की मां और मीना का भाई भी शामिल थे। मीना ने काफी साहस करके घटनाक्रम बताया था। लगता है वह अपने पति के बिछुड़ने का दु:ख पी गई है। मीना का कहना था वह भारी मन से प्रदर्शन में शामिल हुई थी। हमें बताया गया कि मीना ने प्रेम विवाह किया था। मीना ने भी बताया कि अभी तक उसे एक लाख रूपये मिले हैं। मीना ने यह भी बताया कि आप पार्टी को छोड़कर किसी अन्य पार्टी का प्रतिनिधि उनके यहां नहीं आया। खंडवा की मेयर भाजपा की श्रीमती शाह जो मंत्री श्री विजय शाह की पत्नी हैं। वहां के सांसद नंदसिंह चौहान अभी हाल में प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने हैं। मीना की मां ने कहा कि मेरी बेटी के सामने पूरा जीवन पड़ा है। जरूरत है उसे अपने पैरों पर खड़े होने की। मीना ने बताया कि विरोध प्रदर्शन का आयोजन मातृशक्ति नामक संस्था ने किया था। उन्होंने इस आरोप को गलत बताया कि प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिये गये थे। खंडवा में कुछ लोगों की राय है कि इतने लंबे समय तक कर्यू लगाने की आवश्यकता नहीं थी। परंतु कुछ लोग कह रहे थे कि कर्यू लगाना उचित था। लंबे समय तक कर्यू लगाने से स्थिति और नहीं बिगड़ी और दोनों समाजों के लोग एक दूसरे के सामने नहीं आ सके। वैसे खंडवा में कुछ लोग चाहते थे कि मामला और बिगड़े ताकि शहर में पूरी तरह से धु्रवीकरण हो सके और उसका लाभ आने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव में लिया जा सके।

  हमें यह भी बताया गया कि कर्फ्यू में ढील भी अत्यधिक समझदारी और व्यवस्थित तरीके से दी गई थी। कर्फ्यू के दौरान उन लोगों को ही पेट्रोल पंपों से पेट्रोल मिल सका जिनके पास अधिकृत कर्फ्यू पास थे। इसके अतिरिक्त ऐसी महिलाओं को पेट्रोल दिया गया जो अपने वाहन चलाकर पेट्रोल पंपों तक आई थीं। कर्फ्यू लगने के बाद सभी पेट्रोल पंपों को सील कर दिया गया ताकि कोई व्यक्ति पेट्रोल का उपयोग आग लगाने में न कर सके।

 यहां पर यह उल्लेख आवश्यक है कि खंडवा में छोटे-छोटे मुद्दों पर सांप्रदायिक विद्वेश भड़कने की संभावना रहती है। वैसे भी जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि खंडवा में प्रतिबंधित सिमी की गतिविधियां चलती रहती हैं। एक प्रमुख कांग्रेसी नेता ने यह भी बताया कि पर्दे के पीछे संघ परिवार से संबंधित संगठन और सिमी के लोग मिले हुये हैं। वैसे वे अपने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं बता सके। कुछ लोग इस बात की आलोचना कर रहे थे कि स्थिति सामान्य होने के पहले ही यहां पदस्थ महिला कलेक्टर का स्थानांतरण कर दिया गया। दबी जुबान से यह भी कहा जा रहा था कि कहीं उन्हें स्थिति पर शीघ्र नियंत्रण पाने के लिये दंडित तो नहीं किया गया? यह संयोग की बात है कि इस समय दोनों बड़ी पार्टियों-भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस-के अध्यक्ष खंडवा से ही आते हैं। जहां प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अरूण यादव खंडवा से सांसद रह चुके हैं वहीं भाजपा के नव-नामांकित अध्यक्ष नंदू सिंह चौहान अभी हाल के लोकसभा चुनाव में विजयी हुये हैं। इन दोनों नेताओं के बावजूद खंडवा का साम्प्रदायिक तनाव का गढ़ बना रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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