Wednesday, May 30, 2012

मध्य प्रदेश के गाडरवारा में दलितों के बहिष्कार को लेकर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट



फैक्ट फाइंडिंग रिर्पोट



म.प्र. में नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील के मारेगाॅव में सवर्ण जातियों द्वारा दलित समुदाय का सामाजिक/सांस्कृतिक और आर्थिक बहिष्कार को लेकर रिर्पोट

जिला - नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश )

तहसील - गाडरवारा

फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा भ्रमण किए गए गाव - मारेगाव ( गाडरवारा)

भ्रमण दिनांक - 2 मई 2012




नागरिक अधिकार मंच, राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच और युवा संवाद भोपाल द्वारा जारी रिर्पोट


मध्यप्रदेश के नरसिंगपूर जिले के गाडरवारा तहसील से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर बसे मारेगाव में अहिरवार समुदाय( दलित ) के लोगों के साथ ऊॅची जाति के समुदाय द्वारा लगभग 2 माह से सामाजिक/सांस्कृतिक और आर्थिक बहिष्कार किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि नागरिक अधिकार मंच और युवा संवाद द्वारा 2009 में गाडरवारा तहसील के चार गाव नान्देर, मड़गुला, देवरी और टेकापार में अहिरवार समुदाय( दलित ) के लोगों के साथ ऊॅची जाति के समुदाय द्वारा किये गये सामाजिक/सांस्कृतिक और आर्थिक बहिष्कार को लेकर फैक्ट फाईडि़ग किया जा चुका है। दोनो ही केस में अहिरवार समुदाय के बहिष्कार का मुख्य कारण उनके द्वारा सदियों से चली आ रही मृत मवेषी को उठाने जैसे धृणित काम से इनकार करना था। अहिरवार समाज के इस निर्णय को सदियों से जाति के आधार पर दलितों को इंसान ना मानने वाले सवर्ण समाज ने बगावत के रुप में लिया। म.प्र. के गाडरवारा तहसील के गावों में अहिरवार समाज पर पिछले 2/3 सालों से समय समय पर लगायी जा रही सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक पाबंदिया इसी मानसिकता का परिणाम है।

देश  प्रदेश में जातीय भेदभाव के खिलाफ कई कानून और सवैधानिक प्रावधान हैं। संगठनों द्वारा पिछली बार की गई फैक्ट फाइडि़ग को लेकर एक लम्बी प्रक्रिया चलाई गई थी। विभिन्न सबंधित सरकारी विभागों, आयोगों को ज्ञापन सौपे गये, मीडि़या में मुददा उठाया गया तब जा कर सरकार की तरफ से कुछ कार्यवाहिया हुई और उन 4 गाॅवों में सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक  पाबंदियो  को झेल रहे अहिरवार समुदाय को कुछ राहत मिली।
लेकिन स्थितिया पूरी तरह से नही बदली। फिर उसी तहसील के गावों में फिर वही कहानी दुहरायी जा रही हैं। जातीय भेदभाव के खिलाफ कई कानून और सवैधानिक प्रावधान होने के बावजुद ऐसी घटनाऐं पूरे देश  में लगातार घट रही हैं। ऐसे में बड़ी चुनौती ये है कि दिमागों और सदियों से चले आ रहे व्यवहार में बसे जातीय आधारित भेदभाव, उत्पीड़न और शोषण का खात्मा कैसे हो जो नित्य नये नये रुपों में हमारे सामने आ रही हैं।

बहरहाल जातीय भेदभाव के अंतहीन कड़ी में म.प्र. के एक गाव में अहिरवार समुदाय जिनकी खता महज इतनी थी कि उन्होनें मरे जानवरों को उठाने जैसी अमानवीय परम्परा को आगे ढोने से इनकार कर दिया था, के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक बहिष्कार की कहानी कहती हुई यह रिर्पोट




नरसिंहपुर जिले का परिचय

नरसिंहपुर जिला मध्यप्रदेश  के जबलपुर संभाग के अंर्तगत आता है। नरसिंहपुर मध्यप्रदेश  की राजधानी भोपाल व जबलपुर के बीच में स्थित है। नरसिंहपुर का आर्थिक क्रियाकलाप मुख्यतः गन्ने व दाल की खेती है। नरसिंहपुर में राजपूत,लोधी, पटेल, किरार व अहिरवार समुदाय की आबादी ज्यादा है। गाडरवारा नरसिंहपुर की प्रमुख तहसील है।

गाडरवारा

नरसिंहपुर की प्रमुख तहसील गाडरवारा की आबादी 70 से 80 हजार जिसमे अहिरवार समाज के लगभग 38 से 40  हजार लोग है। गाडरवारा की 80 से 85 फीसदी आबादी खेती के कार्यों में संलग्न है। इसमें खेतिहर मजदूर और भूमिहीन किसानों की तादाद ज्यादा है। इन खेतिहर मजदूरों में अधिकांश  आबादी दलित समुदाय की है। जिसमें सबसें ज्यादा अहिरवार (चमार) जाति के लोग है। संविधान के अनुसार यह जाति अनुसूचित जाति में शामिल  है। पूरे भारत में अनुसूचित जाति की जनसंख्या में एवं हिन्दी क्षेत्र में चमार जाति (जो कि अपमानसूचक संबोधन है) की संख्या सबसे ज्यादा है। भारत में यह 700 से ज्यादा उपनाम से चिन्हित की जाती है।

गाडरवारा के आस-पास के लगभग सभी गांव में अहिरवार समुदाय के लोग निवास करते हैं। उनकी यहां के सामाजिक-आर्थिक क्रियाकलापों में उपयोगी भूमिका है।

अहिरवार समुदाय का सामुहिक निर्णय और मौजूदा उत्पीड़न की शुरूआत

अहिरवार समुदाय की महापरिषद द्वारा मध्य प्रदेश स्तर पर अक्टूबर 2009 में तय किया गया कि अब समुदाय द्वारा मृत मवेशी  नहीं उठाए जाएगें। जिसके तहत गांवों में अहिरवार समुदाय के लोगों द्वारा इस घृणित कार्य को बंद किया जाए और सवर्णों द्वारा मवेषी उठाने के कारण सदियों से चली आ रही छुआछूत व भेदभाव को कम किया जा सके।

 मारेगाव की स्थिति

मारेगाव गाड़रवाड़ा तहसील के सालेचैकी से 3 कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है। यहा लोधी, कोटवार, लौहार, कलावार तथा अहिरवार समुदाय के लोग रहते हैं। इस गाव की जनसंख्या लगभग 2000 है। जिसमें से लगभग 100 परिवार अहिरवार समाज के है। ऊॅची जाति (लोधी) के लोग बड़े खेतिहर है। इन्ही लोगों के खेतों में अहिरवार समुदाय (दलित) के लोग मजदूरी करते है। गाव में अहिरवार समुदाय के केवल 4/5 परिवार के पास ही आधा एकड़ जमीन है। अहिरवार समाज का टोला गाव में अलग है। पूरे अहिरवार समाज में से 80 प्रतिषत परिवार अति गरीब है।

अहिरवार समाज महापरिषद द्वारा गाडरवारा तहसील में पिछले 3/4 वर्षो से समुदाय द्वारा मृत मवेशी  न उठाने के लिए आम सहमति बनाई जा रही थी जिसके तहत गांवों में अहिरवार समुदाय के लोगों द्वारा इस घृणित कार्य को बंद किया जाए और सवर्णों द्वारा मवेशी उठाने के कारण सदियों से चली आ रही छुआछूत व भेदभाव को कम किया जा सके।

इसी आम सहमति के चलते मारेगाव के अहिरवार समाज ने 3/4 माह पहले गाव से मृत पशुओं को ना उठाने का निर्णय लिया था। इसी के बाद से ऊॅची जाति ( लोधी समुदाय ) द्वारा इस समाज का सामाजिक/सांस्कृतिक और आर्थिक बहिष्कार किया जाने लगा जो अभी तक बदस्तूर जारी है। अहिरवार समाज द्वारा उनके साथ हो रहे उत्पीड़न को लेकर प्रशासन  को लगातार शिकायतों व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग किए जाने के बावजूद प्रषासन का रवैया बहुत सकारात्मक नही रहा है।


फैक्ट फाइंडिंग टीम से चर्चा के दौरान अहिरवार समाज के लोगों से जो तथ्य सामने आये उसकी विस्तृत रिपोर्ट ।


फैक्ट फाइंडिंग टीम को मारेगाव के अहिरवार समुदाय के लोगों ने बताया कि आम सहमति के चलते उन्होनें गाव में मृत पशुओं को ना उठाने का निर्णय लिया है। इसी के बाद से लोधी समाज द्वारा अहिरवार समाज का सामाजिक/सांस्कृतिक और आर्थिक बहिष्कार किया जा रहा है।

मारेगाव के सीताराम अहिरवार ने बताया कि इस साल होली के कुछ दिन पहले लोधी समाज के लोगों ने उनके समाज के लोगों को गाव से मरे पशु को उठाने को कहा तो उन लोगों ने यह काम करने से मना कर दिया। परिणाम स्वरुप लोधी समुदाय के लोगों ने पंचायत बुलाया जहा  अहिरवार समुदाय के लोगों को भी बुलाया गया था। पंचायत में अहिरवार समुदाय के लोगों के साथ ऊॅची जाति के लोगों ने गाली गलौज किया और अपमानित कर भगा दिया तथा दूसरे दिन पूरे गाव में डि़डोरा पीटवा कर यह ऐलान कर दिया गया कि अहिरवार समाज का हुक्का पानी बंद कर दिया गया है और कोई भी इनसे सबंध नही रखेगा।

सामाजिक/सांस्कृतिक प्रतिबंध

गाव में प्रवेश  पर रोक

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि लोधी समाज ने उनके गाव के अंदर आने पर रोक लगा दिया है तथा अन्य गाव में जाने वाले रास्तों को भी बंद कर दिया गया है। जिसके कारण इन्हें अन्य गाव में जाने के लिए बहुत लम्बी दूरी तय करके जाना पड़ता है।

रोजमर्रा के आवशयक चीजों पर प्रतिबंध

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि लोधी समाज के लोगों ने गाव में स्थिति सभी दुकानदारों को अहिरवार लोगों को राशन , किराना का सामान देने से मना कर दिया है। उन्होनें आटा चक्की वालों से भी कहा है कि वे अहिरवार समाज के किसी भी परिवार का अनाज नही पीसेगें।  दूध बेचने वाले को भी डराया/धमकाया गया है जिसके कारण वह अहिरवार समुदाय को दूध नही बेचते हे । इसलिए इन्हें दूध लेने के लिए गाव से 3 कि.मी. दूर स्थित सालेचैकी गाव आना पड़ता है। ऐसे में अगर उनके समुदाय का कोई बच्चा बीमार होता है और डाक्टर उसे दूध के साथ दवा खाने को कहते हैं तो गाॅव में दूध ना मिलने के कारण बच्चे को पानी के साथ ही दवा खिलाना पड़ता हैं।

पीने के पानी पर प्रतिबंध

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि वे लोग पहले अपने टोले मे स्थित हैड़पम्प के साथ साथ गाव के मंदिर के पास के हैड़पम्प से भी पानी भरते थे। पानी के दो स्रोत होने के कारण पानी की समस्या नही होती थी लेकिन वर्तमान में लोधीयों द्वारा मंदिर तथा उसके पास के हैड़पम्प के चारों ओर फेनसिंग तार लगा कर बंद कर दिया गया है। जिससे पूरे अहिरवार समुदाय अब पूरे समुदाय को टोला में स्थित एकमात्र हैड़पम्प पर ही निर्भर रहना है, एक हैड़पम्प 100 परिवारों के लिए पानी की जरुरत के हिसाब से कम पड़ता है गर्मी में तो ओर समस्या हो रही है एक ओर तो गर्मी के कारण पानी की जरुरत बढ़ गई तो दूसरी तरफ जल स्तर भी नीचे चला गया है।

कुछ महिने पहले जब अहिरवार समुदाय की कुछ महिलाऐं मंदिर वाले हैडपम्प में पानी भरने गयी थी तो मंदिर के पंडि़त कमल तिवारी ने अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि ‘इन चमारों का पानी का बर्तन फेंक दो’ और वहा से भगा दिया था।

तालाब के पानी पर प्रतिबंध

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव में एक तालाब है जिसके पानी को जानवार पीते है तथा गाव के लोग उस तालाब के पानी का उपयोग नित्यकर्म के लिए करते है, इस तालाब को भी लोधी समुदाय द्वारा चारो ओर से फेनसिंग तार लगा कर बंद कर दिया गया है। जिसके कारण अब इस तालाब में अहिरवार समुदाय के जानवार पानी नही पी पा रहे हैं और ना ही वे इस पानी का उपयोग नित्यकर्म के लिए नही कर पा रहे हैं। अब इन लोगों को जानवरों को पानी पीलाने के लिए बहुत दूर ले जाना पड़ रहा है।

अहिरवार समाज की महिलाओं ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव के किसी भी अहिरवार समुदाय के घर में भी शौचालय नही है। इसी वजह से पूरे परिवार को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है प्रतिबंध लगने के बाद से लोधी समुदाय के लोग शौच के लिए रास्ता भी रोकने लगे हैं। यह इस तरह से होता है कि लोधी समुदाय के लोग शौच स्थान के पास के चैराहे पर जानबूझ कर खड़े हो कर घंटों बात करते है जिसकी वजह से महिलाऐं और बच्चियों को शौचालय जाने और करने में दिक्कत होती है।

कदम कदम पर अपमान और भेदभाव

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव के लोधी समुदाय के लोग अहिरवारों को अपमानजनक सूचकों से संबोधित करते है।
लोधी समुदाय के लोग पास में स्थित सालेचैकी गाव  के भी दुकानदारों (जो स्वंय भी ज्यादातर लोधी समुदाय से हैं) को कहते है कि ‘इन चमारों (अहिरवारों) को समान मत दिया करो।’ ये दुकानदार सभी लोगों को कांच के गिलास में चाय/पानी देते है लेकिन अहिरवारों को दुकान के अंदर नही आने दिया जाता है और उन्हें कुल्हड़ में पानी/चाय दिये जाते हैं।
गाव के अहिरवार समाज के लोगों ने बताया कि मारेगाव में सरपंच की सीट हरिजन महिला के लिए आरक्षित है। वर्तमान की महिला सरपंच अहिरवार समाज से ही है लेकिन जब भी पंचायत की बैठकें होती है तब ऊॅची जाति के पंच दरी पर बैठते हैं और सरपंच जमीन में बैठती है। अहिरवार समाज द्वारा इसका जब विरोध किया गया तो सभी लोधी नाराज होकर ग्राम सभा छोड़ कर चले गये।

बच्चों के साथ स्कूल में भेदभाव

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि अहिरवार समाज के बच्चों के साथ स्कूल में भी भेदभाव होता आ रहा है।

मध्यान भोजन

बच्चों ने बताया कि ऊॅची जाति के बच्चें मध्यान भोजन के समय अहिरवार समाज के बच्चों से अलग बैठ कर भोजन करते हैं। लोधी समुदाय के बच्चों को भोजन करने के लिए स्कूल से ही थाली दी जाती है और भोजन उपरान्त उनके बर्तन को रसोइन बनाने वाली ही साफ करती हैं।
जबकि अहिरवार समुदाय के बच्चों को मध्यान भोजन के लिए अपने घर से अपना बर्तन लेकर आना पड़ता हैं जिसे भोजन उपरान्त वे स्वंय धोते हैं।
मध्यान भोजन परोसने वाली रसोइन ऊॅची जाति के बच्चों को पहले खाना देती है तथा उन्हें अच्छी रोटी और मसालेदार गाढ़ी सब्जी दी जाती है तथा इनके द्वारा ओर भोजन मांगने पर रसोइन द्वारा पुनः दिया जाता है ।

लेकिन अहिरवार समुदाय के बच्चों को रसोइ महिला द्वारा थाली में रोटी/पूड़ी फेंक कर दिया जाता है ताकि वह इन बच्चों के सम्पर्क में (छू ना जाये ) ना आ पाये। रसेाइन इन बच्चों को सब्जी में पानी मिला कर देती है। इन बच्चों को पेट भर भोजन नही दिया जाता है, उन्हें केवल 2/2 पूड़ी ही दी जाती है। अगर बच्चे ओर भोजन मांगें तो वो डाटती हैं साथ ही साथ अहिरवार समुदाय के बच्चों को सबसे बाद में भोजन दिया जाता है।

साफ-सफाई

बच्चों ने बताया कि स्कूल में उन्हें ही कक्षा की साफ सफाई का काम करना पड़ता हैं। जबकि सवर्ण जाति के बच्चे ये काम नही करते हैं

कक्षा की बैठक व्यवस्था में भेदभाव

बच्चों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाॅव की शासकीय शाला में लोधी समाज के बच्चे एक साथ बैठते है और वे अहिरवार समुदाय के बच्चों के साथ ना तो बैठते हैं और ना ही उनके साथ खेल खेलते हैं। अगर कोई बच्चा भूल से ऊॅची जाति के बच्चों के पास बैठ जाता है तो वो उसे गाली देकर भगा देते हैं। ये बच्चे अहिरवार बच्चों को "चमट्टू" कह कर सबोधित करते हैं।

शिक्षकों द्वारा भेदभाव

चर्चा के दौरान बच्चों ने बताया कि शिक्षको  द्वारा ऊॅची जाति के बच्चों से ही पानी/चाय मंगाया जाता हैं लेकिन उनके हाथ से कभी पानी/चाय नही मंगाया है। अगर स्कूल में कभी बाहर से कोई अधिकारी आता है तब भी चाय/पानी लोधी के बच्चे ही लाते हैं।

मंदिर में प्रवेश वर्जित

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव में स्थित मंदिर में उनका प्रवेश  वर्जित है। वैसे तो बहिष्कार से पहले अहिरवार समाज के लोग मंदिर में भगवान के दर्शन और पूजा बाहर से ही कर सकते थे। लेकिन वे मंदिर के अंदर नही जा सकते थे। एक बार अहिरवार समुदाय के कुछ लोग मंदिर के अंदर चले गये थे तो लोधी समुदाय के लोगों द्वारा उन सभी लोगों पर प्रति व्यक्ति 15 रु जुर्माना लगाया गया और उनसे सबके सामने माफी मंगवाया गया और यह प्रण लिया गया कि आगे से वे कभी भी मंदिर में प्रवेश  नही करेगें।

वर्तमान में लोधी समाज द्वारा मंदिर के चारो ओर फेन्सींग तार लगवा दी गई है जिसके कारण अब अहिरवार समाज भगवान की पूजा अर्चना मंदिर के बाहर से भी नही कर सकते हैं।


सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भेदभाव

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव के पंडि़त दूसरे सभी समाज के लोगों की शादी करवाते हैं लेकिन अहिरवार समाज में शादी नही करवाते है क्योंकि लोधी समाज के लोगों ने उन्हें ऐसा करने के लिए मना किया है और उनकी बात ना मानने पर मारने की धमकी दी है।
बहिष्कार के पहले गाव में कही भी शादी हो अहिरवार समाज के लोगों को बुलाया जाता था लेकिन अब शादी में नही बुलाया जाता है।

डराना/धमकाना

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि लोधी समाज के लोग उन्हें डराते और धमकाते है, उनके घर में आग लगाने, जान से मारने की धमकी देते हैं। अहिरवारों को गाव छोड़ कर चले जाने को कहते हैं।
जो कोई भी अहिरवार समाज की मदद करना चाहता है, उसे भी लोधी समुदाय के लोग डराते/धमकाते हैं। लोधी समाज ने गाॅव के सभी दुकानदार, नाई,दूध वाला इत्यादी को यह धमकी दी है कि कोई भी दुकानदार ने अहिरवार समुदाय को सामान या मदद की तो उस पर 21,000रु का जुर्माना लगेगा।

आर्थिक प्रतिबंध

गाव में मजदूरी पर रोक

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि लोधी समुदाय द्वारा उनका आर्थिक बहिष्कार भी किया जा रहा है। अहिरवार समुदाय के लोगों के गाव में मजदूरी करने पर रोक लगा दी गई है। लोधी या अन्य कोई भी समुदाय इन्हें अपने खेतों में मजदूरी का काम नही दे रहा है। वे अपने खेतों में मारेगाव के बाहर से मजदूर बुला कर अपना काम करवा रहे हैं। लोधी लोगों ने अपनी जमीन इन्हें बटाई पर देना बंद कर दिया है। खेत में हुए पैदावार की कटाई के लिए इन्हें नही बुलाया जा रहा है।

इसी के कारण अहिरवार समाज के लोगों को मजदूरी के लिए दूसरे गावों में जाना पड़ रहा है। गाव के अंदर से ही उन गाव में जाने के रास्ते है लेकिन लोधीयों द्वारा इन रास्तों पर रोक लगा दिया है जिसके कारण अब इन गाव में मजदूरी के लिए बहुत लम्बा रास्ता तय करके जाना पड़ता है।
जब वे दूसरे गॅावों में मजदूरी के लिए जाते हैं तो जरुरी नही की उन्हें मजदूरी मिल ही जाये। लोगों की बतया कि इसी वजह से उनकी आर्थिक स्थिति दिनों दिन खराब होती जा रही है और अब अहिरवार समाज के सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है।

कुछ अहिरवार समाज के परिवारों के पास आधा एकड या कुछ  डिसमिल की जमीन है वहाॅ भी लोधी समुदाय द्वारा ट्रेक्टर ले जाने रोका जा रहा है।

प्रशासन  द्वारा भेदभाव

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि प्रशासन  में बैठै अधिकारी भी पूर्वागृहों से ग्रस्ति है। गाव में जब भी लोधी और अहिरवार समाज में आपस में समस्या होती है तथा अहिरवार द्वारा इसकी शिकायत सबंधित अधिकारियों से करने पर वे हमेशा  लोधी समुदाय का पक्ष ही लेते है और उनकी शिकायत  पर कोई कार्यवाही नही करते हैं।

शासकीय योजनाओं का लाभ ना मिल पाना


गरीबी रेखा कार्ड

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि गाव में उनके समुदाय के करीब 100 परिवारों में से केवल 20/25 परिवारों के पास गरीबी रेखा कार्ड है। जबकि लगभग सभी परिवार मजदूरी का काम करते हैं। हालाकि ज्यादातर अहिरवार परिवार गरीबी रेखा कार्ड के लिए पात्रता रखते है। दूसरी तरफ लोधी समाज में अनेक ऐसे परिवार है जिनके पास ट्रेक्टर है और उनके पास गरीबी रेखा का कार्ड भी है।

जॉब कार्ड से मजदूरी का ना मिलना

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि उनके सभी परिवारों के जॉब कार्ड को बने 3/4 साल हो गये हैं लेकिन एक/दो लोगों को छोड़ कर ओर किसी को भी इसके अन्तर्गत आजतक मजदूरी नही मिली है। मनरेगा का फायदा केवल ऊॅची जाति के लोग उठा रहे हैं।

अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ

लोगों ने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ ज्यादातर ऊॅची जाति के लोगों को मिल रहा है। फिर चाहे वो बी.पी.एल कार्ड हो या जॉब  कार्ड हो।
अहिरवार समुदाय को किसी भी प्रकार की सरकारी योजना का लाभ नही मिलता है। इंदिरा आवास योजना का लाभ अहिरवार समुदाय की एक ही विधवा महिला को मिला है। जबकि समुदाय की कई ऐसी विधवा महिलाऐं है जिन्हें तत्काल सहायता की जरुरत है।

शासकीय भूमि और चरनोई भूमि पर कब्जा

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि इस गाव के चरनोई और शासकीय भूमियों पर लोधी समाज के लोगों ने कब्जा कर लिया है। गाव में लगभग 80 एकड़ भूमि शासकीय है लेकिन इन पर लोधी समाज का कब्जा है।

स्थानीय अहिरवार समुदाय द्वारा अभी तक विभिन्न कार्यालयों/विभागों में दिये गये ज्ञापन/शिकायत

  • दिनाक 3/3/12 को कलेक्टर नरसिंहपूर, हरिजन थाना,एस.पी. आफीस,थाना काली चैकी को आवेदन दिया गया है।

  • दिनाक 6/3/12 को मुख्यमंत्री और राज्य मानव आयोग को आवेदन फैक्स किया गया है।

  • दिनाक 14/3/12 को अहिरवार प्रगति मंच सागर द्वारा इसी सदर्भ में मुख्यमंत्री को आवेदन फैक्स किया है।

  • दिनाक 18/3/12 को पुनः  मुख्यमंत्री तथा एस.सी./एस.टी आयोग को आवेदन फैक्स की गई है ।

  • दिनाक 20/4/12 को पुनः कलेक्टर, हरिजन थाना, एस.पी, तहसीलदार  गाड़रवारा को आवेदन दिया गया है।

  • दिनाक 30/4/12 को पुनः तहसीलदार गाडरवारा को आवेदन दिया गया है


फैक्ट फांईडि़ग टीम द्वारा आयोग और विभागेां में दिये गये ज्ञापन

  • 2/5/2012 - गाडरवारा में विधायक सुश्री साधना स्थापक से मिले और उनके साथ मारेगाव की स्थिति पर बातचीत की। उन्होनें आश्वासन  दिया था कि वे स्वंय दो/तीन दिन के अंदर उस गाव में जायेगी और स्थिति का जायजा लेगीं लेकिन अभी तक वे उस गाव का भ्रमण करने नही पहुची हैं।

  • 3/5/2012 - इसी विषय पर राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच के एल.एस.हरदेनिया जी द्वारा कलेक्टर नरसिंहपुर से फोन में चर्चा हुई। उन्होनें तत्काल कार्यवाही करने का आश्वासन दिया था।

  • 4/5/2012 - इसी विषय को लेकर मध्यप्रदेष के डी.जी.पी. श्री नंन्दन दुबे से मिलने गये। उन्होने कार्यवाही का  आश्वासन  दिया था।

  • 14/5/2012 - इसी विषय को लेकर मुख्यमंत्री के निवास स्थान पर ज्ञापन और रिर्पोट दिया गया।

  • 14/5/2012 - इसी विषय को लेकर राज्य मानव अधिकार आयोग में श्री अहमद साहब को ज्ञापन और रिर्पोट दिया गया। unhone कहा कि कलेक्टर से इस विषय पर रिर्पोट मंगवाई है जो कलेक्टर द्वारा जाँच  करके लगभग दो सप्ताह में आयोग को सौपेगें।

  • 14/5/2012 - राज्य बाल अधिकार और संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुश्री उमा चतुर्वेदी को स्कूल में बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर ज्ञापन और रिर्पोट दिया गया। उन्होनें कहा कि वर्तमान में राज्य के सभी सरकारी स्कूल बंद है। छुट्टीयों के खत्म होने के बाद जैसे ही बच्चे शाला आना प्रारम्भ कर देगें तब आयोग अहिरवार समुदाय के बच्चों के साथ स्कूल में होने  वाले भेदभाव की जाँच  करवायेगी।

  • 15/5/2012 - इसी विषय को लेकर म.प्र. के गृहमंत्री और आदिम जाति /अनुसूचित जाति कल्यांण मंत्री कुवंर विजय शाह को ज्ञापन और रिर्पोट दिया गया।

  • 22/5/2012 - इसी विषय को लेकर ज्ञापन और रिर्पोट दिया गया महामहिम राज्यपाल महोदय को सौपी गई। उन्होनें इस पर तत्काल कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।


प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्यवाही


लगभग 2 माह से लोधी समाज द्वारा अहिरवार समाज के लोगों के साथ भेदभाव लगातार जारी है। अहिरवार समुदाय के लोगों ने इसकी शिकायत  एस.डी.एम. और पुलिस अधिक्षक से की थी जिसके चलते पुलिस अधिक्षक और तहसीलदार गाव आये थे तथा दोनों समुदाय के लोगों को बैठा कर समझाया और समझौता करा कर चले गये। इन अधिकारीयों के सामने तो लोधी समुदाय ने सहमति दर्षायी लेकिन अधिकारियों के आने के बाद उनके व्यवहार में कोई परिवर्तन नही आया और बहिष्कार अभी तक जारी है।

दूसरी तरफ समुदाय द्वारा प्रशासन  को दिये शिकायत पत्र में जिन लोगों के खिलाफ नामजद षिकायत किया गया है उन पर अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई है।

अहिरवार समुदाय के लोगों ने इस भेदभाव के खिलाफ हरिजन थाने में भी शिकायत की तो उन्होनें कार्यवाही करने के बदले कलेक्टर के पास जाने को कह कर इस घटना को लेकर कोई कार्यवाही नही की।

अहिरवार समुदाय के लोगों ने कलेक्टर को 20/04/2012 को बहिष्कार को खत्म करने के लिए आवेदन दिया गया तब गाव में पुनः तहसीलदार, एस.पी. तथा थाना प्रभारी आये तथा पूरे गाव को इक्टठा किया तथा लोगों को समझाया और सामजस्य बनाने की समझाईस दी तथा तालाब में लगे फेनसिंग तार को तत्काल हटाने और दुकानदारों को सामान देने को कहा गया।

सरकारी दबाव के कारण गाव में एक आटा चक्की तथा एक किराना दुकानदार अहिरवार समाज को सामान देने को राजी हुए हैं और वर्तमान में अहिरवार समुदाय इन दोनों दुकानों से सामान ले रहे है लेकिन गाव के बाकी दुकानदारों द्वारा अभी भी अहिरवार समाज का बहिष्कार जारी है।

लोगों ने तहसीलदार से कचरापेटी और शौचालय की समस्या को लेकर भी आवेदन दिया गया था। जिस पर  तहसीलदार द्वारा बताया गया कि शौचालय के लिए राशि का आबंटन हो गया है लेकिन पहले समुदाय के लोगों को अपने घरों में स्वंय के पैसे से शौचालय बनाना होगा उसके बाद ही उन्हें राशि की भुगतान की जायेगी। यह भुगतान उन्ही परिवारों को किया जायेगा जिनके पास गरीबी रेखा का राशन कार्ड होगा।

मारेगाव के अहिरवार समाज के लोगों ने फेक्ट फाइडि़ग टीम को बताया कि गाव में कचरादानी के लिए शासन की तरफ से स्वीकृति मिल गई थी लेकिन जिस सरकारी भूमि पर कचरादानी बनाया जाना था उस स्थान के सामने रहने वाले सीताराम चैकसे ने इसे नही बनने दिया। जब लोगों ने इसकी शिकायत  की तब 1/05/2012 को पटवारी और आर.आई गाव आये थे और लोगों से कहा था कि गाव के कई सारे मकान सरकारी भूमि पर बने है पहले वो सब मकान टूटेगें उसके बाद ही कचरादानी बनेगा।

समस्याओं का अतं ना होते देख अहिरवार समाज ने पुनः 30/04/2012 में तहसीलदार में शिकायत  की लेकिन तब से टीम के भ्रमण करने के दिन तक तहसीलदार और थाना चोकी की ओर से कोई भी अधिकारी गाव नही पंहुचा था।

अहिरवार समाज के लोगों ने वर्तमान विधायक सुश्री साधना स्थापक तथा पूर्व एम.एल.ए. श्री पटेल से इसकी शिकायत की परन्तु उनके द्वारा भी अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई।


हमारी मांगें
फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा उपरोक्त स्थितियों को देखते हुए प्रषासन से तत्काल कार्यवाही के लिए निम्नलिखित मांगें की जाती है -



  • सवर्ण समाज द्वारा अहिरवार समुदाय के गाव प्रवेश  पर लगे रोक को तत्काल प्रभाव से हटाया जाये तथा अन्य गाव में जाने वाले रास्ते को तत्काल खोला जाये।

  • रोजमर्रा के आवश्यक  चीजों पर लगी रोक को तत्काल प्रभाव से हटाया जाये।

  • सर्वण वर्ग के जिन लोगों द्वारा मृत मवेशी उठाने को विवश  किया जा रहा है, उन सभी पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया जाए।जिन लोगों द्वारा मृत मवेशी उठाने को मजबूर किया जा रहा है उन पर उचित कार्यवाही की जाए।

  • जिनके पास जार्ब कार्ड है उन्हें तुरंत मनरेगा के तहत मजदूरी मिले।

  • सरकार द्वारा चलाए जा रहे कल्याणकारी कार्यक्रम एवं योजनाओं जैसे - इंदिरा आवास योजना, नरेगा, वृ़द्धा अवस्था पेंशन , गरीबी रेखा में सर्वें में नाम से अहिरवार समुदाय के लोगों को वंचित रखा गया है। प्रभावित गांवों में शासन  द्वारा विषेष लाभ सीधे शासन  के विभागों द्वारा सुनिष्चित किया जाए।

  • सवर्ण वर्ग द्वारा प्रभावित ग्रामों की षासकीय कृषि भूमि, निस्तारण भूमि, पर अतिक्रमण कर स्वयं काबिज हैं। और अहिरवार समाज के लोगों को सैकड़ों वर्षों के मूल निवासी होने के बावजूद भूमि पट्टा , कृषि भूमि पट्टे  एवं आवसीय पट्टे  से वंचित किया गया है। इस तरफ शासन  द्वारा कभी ध्यान नहीं दिया गया है। अतः दलित समुदाय को कृषि भूमि व आवासीय भूमि के पट्टे दिए जाए।

  • स्कूल में मध्यान भोजन में बच्चों के साथ किये जा रहे भेदभाव को तुरतं रोका जाये।

  • तालाब और हैड़पम्प के चारों ओर लगे फेन्सींग तार को तत्काल हटाया जाये।

  • अहिरवार समाज में व्याप्त भय से निजात दिलाने के लिए प्रशासन  द्वारा कड़े कदम उठाए जाये।

  • अनुसूचित जातियों पर अत्याचार का प्रमुख कारण जातिगत भेद, अस्पृष्यता एवं संकीर्ण मानसिकता है। इस मानसिकता में बदलाव के लिए जनजागरण के कार्यक्रम चालने का काम म.प्र. शासन के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग का है। इस disha  में संबंधित विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में साल भर सद्भावनार्थ, अस्पृष्यता व भेदभाव निवारणार्थ के समयबद्ध कार्यक्रम चलाए जाए।

  • विशेष रूप से, मृत मवेषी उठाने को विवष करने के विरोध स्वरूप षासन द्वारा प्रभावित ग्रामों के अलावा सम्पूर्ण जिला नरसिंहपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में परचे, पोस्टर, दीवार लेखन व अन्य प्रचार प्रसार माध्यमों से सद्भावना का वातावरण तैयार करवाया जाए।

  • सवर्णों से पीडि़त अहिरवार समाज के लोगों को प्रभावित गांवों में किराना दुकान, चाय-पान के अलावा अन्य व्यवसायों के लिए अन्तया व्यवसायी निगम,अनुसूचित जाति वित्त् एवं विकास निगम द्वारा सीधे ऋण /अनुदान से साहयता प्रदान कराई जाए।

  • प्रभावित ग्रामों के अहिरवार समाज की बस्तीयों में सड़क, पानी, बिजली, स्वच्छता के कार्य प्राथमिकता के आधार पर करवाये जाए।शोचालय , स्नानागार एवं समाज के सामाजिक उपयोग जैसे शादी -विवाह, सांस्कृतिक कार्य आदि को सम्पन्न करने हेतु सामुदायिक भवन इन सभी गांवों में सीधे शासन द्वारा  स्वीकृत कर शासन की निर्माण एजेंसी के माध्यम से निर्मित कराया जाए।

  • इस समस्या के स्थायी हल के स्थायी उपाय किए जाएं।जिस प्रकार से षहरी क्षेत्रों में नगर निगम एवं म्यूनसिपल कमेटी द्वारा मृत मवेशी  उठाने की व्यवस्था है, उसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यवस्था की जाए।


फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य

एल.एस. हरदेनिया (राष्ट्रीय सेक्यूलर मंच) - 9425301582
उपासना बेहार (नागरिक अधिकार मंच ) - 9424401469
मधुकर शर्मा ( युवा संवाद) - 9893032576
रिर्पोट में सहयोग - जावेद अनीस

yuvasamvadbhopal@gmail.com
nambhopal@gmail.com


पूरी रिपोर्ट पी डी एफ़ फार्मेट मैं यहाँ 

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