Saturday, March 31, 2012

मजाक बन कर रह गया है जेएनएनयूआरएम


ज्ञानेंद्र सिंह/एसएनबी नई दिल्ली।


 राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के बाद केंद्र का सर्वाधिक बजट वाला जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) भी लगभग सभी राज्यों में मजाक बन कर रह गया है। निकाय पदाधिकारियों को इतने बड़े मिशन के लिए वाहवाही की जगह आम लोगों की खरी-खोटी सुनने को मिल रही है। 

पिछले दिनों शहरी विकास मंत्री कमलनाथ के समक्ष यह कड़वी सच्चाई देशभर के नगरपालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों ने सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। अधिकांश अध्यक्षों का आरोप था कि उक्त मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि के वितरण में भेदभाव बरता जाता है। बड़े शहरों को मुंहमांगी रकम दे दी जाती है और छोटे शहरों व कस्बों को नजरंदाज कर दिया जाता है, जिसके चलते छोटे नगरपालिका व नगर पंचायतों का बुरा हाल है। धन के आभाव में न तो कोई बुनियादी ढांचा विकसित हो पाया है और न ही पर्याप्त मानव-शक्ति है।

 कर्नाटक से आए शशिकांत शेट्टी ने कमलनाथ से साफ शब्दों में कहा कि जेएनएनयूआरएम के तहत केंद्र सरकार से राज्य सरकारों को मिलने वाला पैसा यदि नगरपालिका व नगरपंचायतों को सीधे भेजा जाए तो छोटे शहरों में वह नजर आएगा और आम जनता को उसका लाभ भी मिलेगा। अभी जो पैसा आता है वह बड़े शहरों में बट जाता है या फिर राज्य के बड़े नेताओं के इशारे पर खर्च किया जाता है। इसके चलते हम लोगों की योजनाएं फाइलों में सिमट जाती हैं। आंध्रप्रदेश की एक नगरपालिका के अध्यक्ष कंचेरी गंगाधर ने कहा कि मिशन का हमें कितना लाभ मिल रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पानी व अन्य योजनाओं के लिए हमारे यहां 68 करोड़ रुपए मंजूर हुए मगर आज तक उक्त राशि नहीं मिली।

 इसी तरह पंजाब से आई पंचायत प्रतिनिधि बलवीर कौर ने कहा कि नगरपालिका के पास स्टाफ नहीं होने से काम पूरे नहीं हो पाते। जब तक म्यूनिस्पल सर्विस कैडर नहीं बनेगा तब तक नगरपालिया या पंचायतें कुछ नहीं कर सकतीं। उन्होंने भी जेएनएनयूआरएम के पैसे को छोटे शहरों में भेजने की मांग की। पंजाब से ही लाल सिंह ने आरोप लगाया कि इस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने चाहे जितनी बड़ी रकम भेजी हो लेकिन सच्चाई यह है कि हमारी नगरपालिका को कोई फंड नहीं मिला है। 

चंडीगढ़ से आए सतीशकुमार जैन ने कहा कि जब तक स्थानीय निकायों को आर्थिक मजबूती प्रदान नहीं की जाएगी तब तक जेएनएनयूआरएम का लाभ मिलने वाला नहीं है। छत्तीसगढ़ से आए सुधीर अग्रवाल ने भी कहा कि एक तरफ मिशन के माध्यम से छोटे शहरों को विकसित करने की बात की जाती है और दूसरी तरफ हमारी योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। इसकी वजह से मिशन का पर्याप्त लाभ हमें नहीं मिल पा रहा है। मध्य प्रदेश के स्थानीय निकाय अध्यक्ष अमित चौबे ने तो राज्य सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए शहरी विकास मंत्री से मांग की कि यदि इस मिशन का पैसा राज्यों को दिया जाएगा तो छोटे शहरों व कस्बों का विकास संभव नहीं है क्योंकि यह पैसा छोटी निकायों तक आता ही नहीं है। इसी राज्य से मंदसौर की कुसुम गुप्ता ने भी मिशन की राशि को लेकर राज्य शासन पर दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।

कमलनाथ के समक्ष निकाय अध्यक्षों ने मिशन के धन की बर्बादी का लगाया आरोप

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