Sunday, January 18, 2015

धर्म और स्त्री

Every Religion Protects Women. Protecting Women Is Religion.
"प्रत्येक धर्म नारियों की रक्षा करता है, नारियों की रक्षा करना ही धर्म है|"
पढने में यह पंक्तियाँ पूर्णतः सत्य और तर्कसंगत प्रतीत होती है, बिलकुल ऐसी की मानो किसी धर्म पुस्तक से सीधे ही कॉपी पेस्ट की गयी हो| और तो और जब इन पंक्तियों की सार्थकता सिद्ध करने के लिए विडियो बना दिया जाए, तो क्या कहने| 
ऐसा ही एक विडियो बहुत प्रचलित हो रहा है आजकल इन्टरनेट में | और लोग धड़ल्ले से इसे दुसरो के साथ शेयर किये जा रहे है, बिना सोचे, बिना समझे बस किये जा रहे है वायरल|
विडियो में, एक लड़की को, दो लड़के तंग कर रहे है, तभी कुछ और लड़के(अलग-अलग धर्म को मानने वाले) एक-एक करके लड़की के आस पास खड़े हो जाते है| धर्मो की ऐसी अटूट एक जुटता देखकर, वो दोनों लड़के छुमंतर हो जाते है| लड़की अपने आपको सुरक्षित महसूस करती है|
निश्चित ही वो दोनों लड़के अधर्मी या किसी भी धर्म को ना मानने वाले होंगे क्यूंकि, धर्म को मानने वाला ऐसा घृणित कार्य कर ही नही सकता|
"प्रत्येक धर्म नारियों की रक्षा करता है" - अति उत्तम विचार है जी, अति उत्तम| परन्तु विडम्बना यह है की यह मात्र एक विचार ही है और वास्तविकता इस विचार के कितनी विपरीत है, ये आपको भली भांति ज्ञात भी होगा, पर आप भी क्या करें, आपने धर्म की छवि सुधारने का दायित्व जो ले रखा है, आप कहाँ धर्म और उनके अनुयायियों पर शंका करने वाले, आपके लिए तो धर्म पूर्णतः विशुद्ध, नित्य और मृत्यु पश्चात ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र इन्स्युरैंस जो है|
नारी की धर्म में स्तिथि एक ऐसी कड़वी सच्चाई है की जो पुरुष प्रधान समाज और धर्म प्रतिबद्ध मनुष्यों के गले से नीचे इतनी सरलता से नहीं उतरती| धर्म और उसके ठेकेदारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है नारियों पर आधिपत्य जमाने और उन्हें पुरुषो से कमतर बताने में|
कुछ प्रश्न एवं वाक्य इस ढोंग की कलई खोलते नजर आते है |
धर्मो का ईश्वर किस लिंग का है? 
धर्मो की व्यवस्थाओ के उच्च पदों पर कौन ?
धर्मो की मुख्य पुस्तके/ग्रन्थ किसने लिखी ?
धार्मिक स्थलों पर जाने में प्रतिबन्ध किस लिंग पर है?
सती प्रथा (ब्रिटिश सरकार के दखल के बाद बंद)
पर्दा प्रथा
विच बर्निंग (Witch Burning)
बहु-विवाह का अधिकार किसके पास ?
बलात्कारी से विवाह कराने की पैरवी?
देव-दासी
बड़े शर्म की बात ये है की सूची यहाँ पर ही समाप्त नहीं होती है| धर्म कभी भी नारियों के पक्ष में नहीं रहा है, फिर उसकी रक्षा करना तो दूर की बात है|धर्म का ताना-बाना पुरुषो द्वारा ही बुना गया है, पुरुषो(कुछ वर्ग) अहम् की पूर्ती और उनके हितो को सर्वमान्य रखते हुए| धर्म ने नारियों को नाम मात्र के तथाकथित "अधिकारों" से सुसज्जित किया है|

अगर रक्षा की भी जा रही है तो किससे जानवरों से? या दुसरे मनुष्यों से, मुख्यतः पुरुषो से?
अगर पित्रसत्ता से उपजे कारनामे सूची में जोड़ दिए जाए तो ये स्थिति एक ऐसे स्तर पर पहुँच जाती है जहाँ नारी सिर्फ एक घरेलु पशु और उपयोग की वस्तु से बढ़कर और कुछ भी नहीं होती|
ऐसे में जब धर्म को नारियों का हितैषी और रक्षक बताया जाए| इससे ज्यादा विरोधाभाषी, हास्यापद और अपमानित बात और कोई नहीं हो सकती|
अचंभित करने के बात ये है की प्रायः महिलाएं ही सबसे ज्यादा धार्मिक होती है| पंक्षी और पिंजरा उक्ति को मान्य करते हुए |
वो तो कुछ जगहों पर नारियों ने अपने अधिकारो के लिए लड़ना सीख लिया है, और कुछ पुरुषो को भी इस पाखंड और झूठ का आभास हो चला है और वे भी अपना उतरदायित्व समझकर, धर्म और धार्मिक व्यवस्थाओ का जमकर विरोध करते है| और परिवर्तन की किरण दिखती है परन्तु वो दिन शायद अभी पास नहीं जब नर और नारी के बीच अंतर सिर्फ शारीरिक होगा किसी धर्म विशेष के बताये अनुसार नहीं| 

पित्रसत्ता यह निर्धारित न करे की कोई भी नारी अपने जीवन के प्रति क्या निर्णय ले, कैसे कपडे पहने, किससे बात करे किससे न करे, कैसे पुरुषो के अनुसार व्यव्हार करे|
आज नहीं तो कल वो दिन जरुर आएगा, और उसे लाने के लिए धर्म और पित्रसत्ता दोनों का नष्ट होना नितांत आवश्यक है |
क्यूंकि धर्म, पित्रसत्ता को वैध्यता देता है, और पित्रसत्ता, धर्म को आगे ले जाते रहने का आश्वासन|
धर्म नारी विरोधी था| 

धर्म नारी विरोधी है|

और जब तक पुरुषो का वर्चस्व कायम है, हमेशा रहेगा भी |

Every Religion Oppresses Women. Oppressing Women Is Religion.

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