Thursday, October 17, 2013

छीपाबड़ (हरदा) के दंगा प्रभावित क्षेत्र में भोपाल के संगठनों द्वारा पुनः किये गये भ्रमण की संक्षिप्त रिर्पोट




दिनांक  16 अक्टूबर 2013 को छीपाबड़ के दंगा पीडि़तों के साथ ईद मनाने एवं राहत सामग्री को पहुंचाने के लिए भोपाल से 4 सदस्यी टीम के द्वारा दंगा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया गया। इस टीम में भोपाल स्थित संगठनों एन.एस.आई.भोपाल के जावेद अनीस एवं उपासना बेहार, भा.क.पा.(मा-ले), के विजय कुमार और क्रांतकारी नौजवान भारत सभा के दीपक बंदुले शामिल थे। इसके अलावा  नर्मदा बचाओं आंदोलन के साथियों द्वारा भी राहत सामग्री के साथ यहाँ भ्रमण किया गया।
ज्ञात हो कि हरदा जिले के छीपाबड़ में हुए दंगे को लेकर उपरोक्त संगठनों द्वारा दिनांक 27 सितम्बर 2013 को स्वंतत्र जांच के लिए दौरा किया गया था। इस फेक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा तैयार रिपोर्ट को संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों व आयोगो को मांग पत्र के साथ सौपा जा चुका है।
आज भोपाल एवं एनबीए से आयी टीमों द्वारा दंगा पीडि़त परिवारों के साथ ईद मनायी गई एवं राहत सामगी का वितरण किया गया। सदस्यों का कहना था कि हमारे आने का मकसद पीडि़तों के साथ खुशी के इस माहौल को साझा करना तथा भाईचारा का संदेश देना था।

इस दौरान टीम द्वारा दंगा पीडि़त परिवारों के साथ बातचीत भी की गई। इस दौरान निम्नलिखित समस्याऐं निकल कर आयी -

पीडि़तों द्वारा बताया गया कि दंगें के तुरंत बाद तहसीलदार और पटवारी द्वारा हुए नुकसान का जायजा लिया गया था परन्तु यह समझ से परे है कि पीडि़तों को उनके हुए नुकसान के आधार पर मुआवजा क्यों नही मिला?

  मुआवजा के नाम पर पीडि़तों को बहुत कम राशि दी गई है जबकि उनका नुकसान  दी गई राशि से गई गुना ज्यादा हुआ है। उदाहरण के तौर पर अजीज खान जिनका दंगाईयों द्वारा हमले के दौरान सबकुछ - पूरा घर,समान,अनाज,दो गाड़ियाँ  आदि जल कर खाक हो गये हैं और अंदाजन उनका तकरीबन 10 लाख का नुकसान हुआ है जबकि उन्हें मुआवजे के नाम पर मात्र 50 हजार रुपये दिया गया है। अजीज खान की तरह ऐसे लगभग 10 परिवार है जिनका सबकुछ जल कर खाक हो गया है जबकि मुआवजे के नाम पर महज खानापूर्ती की गई है।

 दंगा पीडित लगभग सभी परिवारों के पास गरीबी रेखा कार्ड तक नही है। हालाकि ये ये परिवार हरसूद से विस्थापित है,विस्थापन से पहले इन लोगों के पास गरीबी रेखा के कार्ड थे जो की यहाँ  आने के बाद निरस्त हो गये हैं। 

पीडि़तों ने टीम को यह भी बताया कि अभी भी कुछ लोगों के बैंको में खाते नही खुले इसलिए उनका मुआवजा मिलने में दिक्कत हो रही है
·       दंगे का बच्चों पर मनोवैज्ञानिक रुप से बहुत ही नकारात्मक असर पड़ा है। ज्यादातर बच्चे अभी भी डरे-सहमें है, अजनबियों को देख कर घर में भागते हैं, ज्यदातर बच्चे अभी स्कूल भी नही जाते हैं। 

टीम का कहना है कि उपरोक्त समस्याओं को लेकर वे स्थानीय प्रषासन और भोपाल स्तर पर संबंधित अधिकारियों से पुनः मिलकर इस सबंध में उचित कार्यवाही की मांग करेगें ताकि पीडि़यों को उचित और सम्मानपूर्ण मुआवजा और न्याय मिल सके।  



टीम सदस्य


जावेद अनीस, उपासना बेहार (एन.एस.आई.भोपाल), विजय कुमार भा.क.पा.(मा-ले),दीपक विद्रोही (क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा

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